जब हमारे रसूल रहमत हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाह अलैहेवसलम खुदा की तरफ से दीने इस्लाम लेकर तशरीफ लाए तो दुनिया भर की सताई हुई औरतों का सितारा चमक उठा और इस्लाम की बदौलत ज़ालिम मर्दों के जुल्म व सितम से निकलकर औरतों का दर्जा मर्दों की तरह उनके बराबर हो गया। औरतों के भी हक़ मुकरर्र हो गये।
उनके हक़ (अधिकार) दिलाने के लिए खुदा की तरफ से क़ानून आसमान से नाज़िल हो गये, अदालतें कायम हो गई, औरतें अपने रक़मों, अपनी तिजारती, अपनी जायदाद की मालिक बन गई।
अपने भाई, मां-बाप, शौहर, औलाद की जायदाद की मालिक बन गई। हर मर्द मज़हबी तौर पर औरतों के अधिकार अदा करने पर मजबूर है।
औरतों को इतनी बुलन्द मंजिलों पर पहुंचा देना, ये हमारे रसूल रहमत हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाह अलैहेवसलम का एहसाने अज़ीम है
उनके हक़ (अधिकार) दिलाने के लिए खुदा की तरफ से क़ानून आसमान से नाज़िल हो गये, अदालतें कायम हो गई, औरतें अपने रक़मों, अपनी तिजारती, अपनी जायदाद की मालिक बन गई।
अपने भाई, मां-बाप, शौहर, औलाद की जायदाद की मालिक बन गई। हर मर्द मज़हबी तौर पर औरतों के अधिकार अदा करने पर मजबूर है।
औरतों को इतनी बुलन्द मंजिलों पर पहुंचा देना, ये हमारे रसूल रहमत हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाह अलैहेवसलम का एहसाने अज़ीम है
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